बुधवार, 14 अगस्त 2013
हम अब भी गुलाम हैं !!
हमें आज़ादी मिले ६६ साल हो गए !
क्या " फेस बुक " पे स्टेटस अपलोड और देर रात की पार्टी को हम आज़ादी मान लें , हम मानसिक आज़ादी की आश में अब भी हैं , हम अंग्रेजियत की गिरफ्त में अब भी हैं , और रहेंगे भी ! चीन ने , जापान ने , रूस ने , कोरिया और जर्मनी ने अपनी भाषा से समझौता नहीं कर अपनी पहचान बनायीं !
हम अंग्रेजों के अनुयायी हो चले , बाबूजी , पापा से डैड बन गए , काका अंकल और मौसी अंटीबन गयी , हमारे सम्बन्ध भी बिलायती हो गयी , जय रामजी की अब हाय हेल्लो बन गए !
सच में हम आज़ाद हो गए !
न बारे बुजुर्गों की आदर की बंदिश न शिष्टाचार में बंधने की आज़ादी ! हम आज़ाद हैं , यही आज़ादी चाहिए थी हमें !
हम अब भी गुलाम हैं !!
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